Sunday, 20 May 2018

हमर परिचय हमर कविता


नाम रमन  गाम हमर अवाम
जन्म राघोपुर तिथि अछि
मई उन्नीस , साल १९६०
काज  चाकरी  परिषद् विधान
 मास्टर प्रबंधन (MBA ) छी
 छी पटना ठाम भेल दड़िभंगा
 जून सत्रह १९८२  भेल विवाह बंधन
सासुर  भौर राजग्राम मधुबनी क एक गाम
 खण्डवला क  कन्या छैथ अर्धांग्नी  वंदन
 ऋषि आ दिव्या छैथ दू संतान .
मातृक भेल राघोपुर कहबैत अछि ड्योढ़ी
बाबू  कृष्णनंदन सिंह क  दोभित्र ,
पौत्र छी प्रभृत छवि
बाबू  भगवान दत्त  हुनक नाम
पुत्र  कमला दत्त क, सहोदर  हम पांच
मूल कर्महे तरौनी विष्णुपुरी क डीह
 मिथिला तत्व विमर्श में लिखल  कूल मूल वृतांत  .
कॉलेज - स्कूल -मंदिर लेल भू  दान
  पूज्य पिता केलैथ कूल क नाम
दू पोथी आंग्ल   भाषा मे
 अनुवादित क हमहू कायल सकाम
एतवे अछि परिचय  अपने सबके प्रणाम .




Sunday, 23 July 2017

EVIL OF BLACK MONEY

EVIL OF BLACK MONEY
राघव संस्कारी और होनहार विद्यार्थी था ,उसने कॉमर्स से स्नातक और एम् बी ए करने के बाद शीर्ष सहकारी संस्था में नौकरी कर रहा था उक्त संस्था में काफी उपरी आमदनी थी लेकिन उसे रास नहीं था उसका मानना  था कि संस्था को फायदा करने में ही  सबकी फायदा है ओ संस्था की बिक्री बढ़ाने  में लगा रहता था और गलत काम का विरोध करता था जिसके कारण  उसकी नौकरी नियमित नहीं की गयी ,तीन वर्ष काम करने के बाद उसे संस्था से सेवामुक्त कर दिया गया  उसने राहत की साँस लिया उसे अपने पर पक्का भरोसा था की बिज़नस से वह जब चाहे पैसा कम सकता था लेकिन उसे  यह पसंद नहीं था कम्पनीज एक्ट ,मैनेजमेंट ,एकाउंटिंग पर काफी पकड़ थी उसकी बारीकी को वह समझता था.उसने अपने एक मित्र को हार्ट इञ्जिकोन प्राइवेट लि तथा एक अन्य मित्र को एग्री लाइन प्रोडक्ट लि नाम की कम्पनी का निबंधन करवा कर काम करने को कहा और खुद नौकरी की तलाश  करता रहा उसे खाद की एक बड़ी कंपनी में नौकरी मिली लेकिन यह नौकरी भी ज्यादे नहीं चला वह पुन : बेरोजगार हो गया पत्नी को घर चलने में काफी दिक्कत उठानी पड़ती थी ,बच्चे बड़े हो रहे थे खर्च बढ़ रहा था उसने कुछ लड़के को पढ़ा कर जो उनसे मिलता काम  निकाल रहा था लेकिन कब तक ऐसा चलता l पत्नी द्वारा हमेशा  पैसा पैसा करने से वह विवश  हो कर खुद का एक कंपनी खोला शेयर के द्वारा पूंजी एकत्र किया ,कंपनी पहले साल २ लाख का शुद्ध  लाभ अर्जित की। दुसरे साल १0  लाख,तीसरे साल २५ लाख चौथे साल १ करोड़  पांचवे  साल १० करोड़  लेकिन अकाउंट में शुद्ध लाभ कम दिखा कर उसने अबतक ५ करोड़   खुदका बना लिया जिससे उसने अपना मकान ,गाड़ी ,पत्नी के लिय जेवरात ,सुख-सुबिधा जुटा  ली अब उसे किसी चीज की जरुरत नहीं रही , एक आदमी की जरुरत किया है अच्छा  खाना , ड्रेस , सुसजित घर l ब्लैक मनी की यह त्रासदी है की उसकी कोई उत्पादकता नहीं होती यह गलत काम में ही लगता है यह राघव समझता था l उसके बच्चे किशोर अवस्था में आ गये उन्हें किसी चीज की कमी नहीं थी ,कार से कॉलेज जाना ,दोस्तों के साथ सैर सपाटा मौज मस्ती ,।घर  में कडोर रूपये रहते थे उसे  बच्चे के अत्यधिक खर्च को देखकर संतोष होता कि  किसी तरह काला पैसा निकल तो रहा है , बच्चे सबसे महंगे ब्रांड के ड्रेस ,महंगे रेस्तरा में खाना ,हवाई सफ़र सैर सपाटा पूरी तरह आधुनिक  / मौड  हो गये , राघव को कब डैड  कहने   लगे उसे भी नहीं पत्ता चला जब उसने गौर किया तबतक काफी वर्ष हो चुके थे एक दिन राघव विदेश से घर लौट रहा था  वह पुराने दिन में चला गया पैसा ने कैसे उसके बच्चों को बदल दिया उसने राहत  महसूस किया की पत्नी तो वही है यानि हमारे हीं ज़माने की संस्कार में पली बढ़ी अपने नाते रिस्तेदारों से प्रेम -संपर्क रखनेवाली , अपने पर्व त्यौहार पारंपरिक तरीके से माननेवाली , कुल देवी की पूजा अर्चना करनेवाली हमारे हर भाव को समझने वाली यानि बेटा = बेटी में जो पीढ़ी का अंतर है या  अति आधुनिकता दिख रही है वह अंतर अर्धांग्नी के साथ नहीं आएगी यह सोच कर राघव का मन शांत हुया और वह एयरपोर्ट से घर पहुंचा सामने पत्नी पर नजर गयी एक नजर में पहचान नहि सका की उसकी पत्नी ही है उसके लम्बे बाल के जगह बॉब कट बाल , जीन्स - टी शर्ट में देखकर वह दंग रह गया ब्लैक मनी ने पत्नी को भी बदल कर रख दिया वह विचलित होकर लौन में कुर्सी पर बैठ गया और पत्नी से एक गिलास पानी लाने को कहा पत्नी ने पास रखे कॉल बेल की रिमोट दबाई और नौकर पुरे यूनिफार्म में अदब से हाजिर हुआ पत्नी ने पानी लाने को हुकुम दी नौकर एक ट्रोल्ली में कई गिलास ,जग ,मिनरल वाटर का बोतल लेकर लॉन की ओर बढ़ रहा था और उधर राघव पत्नी के मोड होने के सदमे में भीतर भीतर उबल रहा था सोच रहा था कि ब्लैक मनी ने पानी को भी सजावट के तरह पेश कर रहा है जैसे हीं ट्रौली नजदीक आया उसने उस पर लात से ठोकर मार दी l शीशा का गिलास - जग सब चकनाचूर हो गया पत्नी संयत भाव में नौकर से कहती है कि दूसरा ट्राली ले आओ और बाजार से एक कार्टून ग्लास और जग ले आना l राघव के आक्रोश को समझनेवाला अब कोई नहीं रहा l 

Sunday, 18 June 2017

Brahmavarcas: Tantrik Maharaja of Darbhanga

Brahmavarcas: Tantrik Maharaja of Darbhanga: I have written before about Maharaja Rameswar Singh an extraordinary King as well as a Tantrik Sadhaka. I amazed having gone through ...

Friday, 9 June 2017

दो पुल की कहानी

 महात्मा गाँधी सेतु उत्तर और दझिन बिहार की लाइफ लाइन कही जाती है अब अपने नये रूप में अवतरित होने की बाट देख रही है वहीँ गंगा नदी पर दीघा – सोनपुर पुल ( जे . पी , सेतु ) से जहाँ रेल सेवा वर्ष २०१५ में प्रारंभ है और एक नये रेलवे स्टेशन पाटलिपुत्र का शुभारम्भ हो चुकी है उक्त रेल सह सड़क पुल से दिनक ११. ०६ .२०१७ को सड़क आवागमन प्रारंभ की जा रही है इसके शुभारम्भ के साथ महात्मा गाँधी सेतु का आवागमन पुल के नये अवतार होने तक बंद हो जायेगा यानि  जे पी सेतु बनकर तैयार है गाँधी सेतु का  स्थान लेने  l गाँधी के बिहार आगमन के शताब्दी वर्ष में महात्मा गाँधी सेतु जो कभी भारत का सबसे बड़ा सड़क पुल था की पुरानी काया यानि पाया पर उपरी संरचना बदलने की प्रक्रिया तेज होगी और उसी तरह हम भी पटना से अपनी गृहस्थी को बदलने और सेवानिर्वृति के बाद एक नये जीवन का शुरुआत होगी l दो पुलों के दरम्यान पटना के कई पुराने चीज स्मृति में हीं रहेंगें बांकीपुर जेल ,नूतन राजधानी के कई बंगले के स्थान पर दिखेंगें संग्राहलय , बुद्धा स्मृति पार्क l ,विधायक फ्लैट –क्लब ,पटेल पथ ,आर .ब्लाक के स्थान पर नये फ्लैट l पुराने अवशेष जमींदोज हो गये l स्टीमर सेवा के समय अशोक राज पथ का एक अलग शान हुआ करता था नये पुल के शुभारम्भ से फिर इस पथ की रौनक बढ़ेगी l पुरानी पटना के स्मृति चिन्ह गोलघर को देखकर पुराने लोग अपनी स्मृति में जहाँ गोते लगायेंगें तो दरभंगा हाउस ,पटना कॉलेज- विश्वविद्यालय बिहार राज्य  के निर्माण की कहानी कहेगी l दो पुलों के शुभारम्भ जहाँ एक पीढ़ी के  अवसान को दिखाती है वहीँ एक नई पीढ़ी की  उत्थान की कहानी है जिसमे कॉफी हाउस और ब्रिटिश लाइब्रेरी अपनी अहमियत खो चुकी I  ये दोनों पुल दो  पीढ़ी की कहानी है  
     मैं १९८१ में MBA की पढाई के लिए पटना आ गया उसके अगले साल शादी हो गयी l महात्मा गाँधी सेतु का शुभारम्भ ठीक उसी साल मई १९८२  को  हुआ l  देश की प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी ने इस पुल का लोकार्पण हाजीपुर साइड में की जिसमे दरभंगा से भी बसों और अपने वाहन से कांग्रेसी कार्यकर्त्ता शरीक हुए जिसमे मेरे पिताजी( जो युवक कांग्रेस के सदस्य थे ) भी थे  और दरभंगा से पटना आना सुगम हो गया पहले पहलेजा से स्टीमर से मेहंद्रू घाट या बांस घाट पर  उतारते  थे l वर्षा के मौसम में गंगा नदी में पानी का प्रवाह तेज रहने से कभी कभी स्टीमर सेवा स्थगित हो जाती थी l  दरभंगा से ट्रेन से समस्तीपुर ,बछवारा , होते हुए सोनपुर से पहलेजा तक की ट्रेन से काफी समय लगता था  या दरभंगा से मुजफ्फरपुर होकर बस से फिर स्टीमर से पटना या दरभंगा से बरौनी –मोकामा होते हुए बस सेवा से l अपने शहर से दूर रहने से पटना के प्रति एक आकर्षण होता था पटना विश्विद्यालय या कॉलेज का काफी नाम हुआ करता था पटना के शत्रुघन सिन्हा अपनी पहचान बॉलीवुड में जमा चुके थे उस समय और पटना से घर जाने पर एक अलग भाव मिलता था लोगों से l पटना से दरभंगा का बस भाडा २५ रूपये हुआ करता था जो गाँधी सेतु बनने  के बाद सिर्फ १६ रूपये हो गये l एक तो पुल बनने से आवागमन की सुबिधा दूसरा मिथिलांचल के मुख्यमंत्री रहने से फ्रेजर रोड के होटल गलियारा के होटलों में काफी भीड़ रहती थी खासकर मिथिलांचल के लोगों की l  रहती भी क्यों नहीं फ्रेजर रोड पर दरभंगा राज का इंडियन नेशन प्रेस जिससे प्रदेश का अग्रणी  हिंदी और अंग्रेजी दैनिक  अखवार आर्यावर्त ,और  इंडियन नेशन और मैथिलि  पत्रिका मिथिलामिहिर का प्रकाशन होता था बगल में हीं एक बड़ी कई एकड़ में फैले कैंपस में चलता था और उसके  बगल में रसगुल्ला के लिए मसहुर पिंटू रेस्टोरंट l दरभंगा के लिए डायरेक्ट प्राइवेट बस BRC -२२ लाइट कार्नर वर्तमान हरिहर काम्प्लेक्स के पास से खुलती थी फिर एक बस बढ़ी थी शायद संगीत सजनी नाम था l उसी दशक में महावीरजी स्थान ,पटना जं का कर सेवा द्वारा भव्य मंदिर का निर्माण हुआ l  
इस पुल से काफी संख्या में बसों का  आवागमन शुरू होने से एक नये बायपास और बस स्टैंड पहले हार्डिंग पार्क फिर मीठापुर कृषि फार्म में हस्तांतरित हुआ इसी दशक में गृह ऋण सुलभ हुई और  मल्टीस्टोरी बिल्डिंग बनना शुरू हुआ , गाँधी मैदान के पास बिस्कोमान टावर पहले सबसे बड़ा था l कबूतर खाना यानि ऑफिसर फ्लैट का भी नाम लिया जा सकता है लेकिन यमुना अपार्टमेंट ,उदयगिरी के निर्माण से नये मल्टीस्टोरी अस्सी के दशक में अस्तित्व में आये l अशियानानगर कॉलोनी प्राइवेट सेक्टर में पहला कॉलोनी बना l
 अब पटना अपना रफ़्तार पकड़ चुकी थी डाक बंगला के जगह लोक नायक भवन ,गाँधी मैदान में गाँधी की भव्य मूर्ति , प्लाटोरियम (तारामंडल ), मोर्यलोक बाजार परिसर , बिस्कोमान की नई टावर जो ऊँची बिल्डिंग में अभी भी अपना स्थान बनाये हुआ है l महात्मा गाँधी सेतु के शुभारम्भ के समय हीं गाँधी नाम की अंग्रेजी फिल्म की बहुत नाम हुआ था जिसमे पटना की नूर फातिमा ने भी रोल की थी वह बिस्कोमान की कर्मी थी l यह एक संयोग है कि इस साल जब हम माहात्मा गाँधी के बिहार यात्रा का शताब्दी वर्ष मना रहे है उसी दौरान रुग्न हो चुके महात्मा गाँधी सेतु पर आवागमन बंद कर उसके उपरी संरचना का कार्य प्रारंभ होगा और उसकी जगह जे। पी  सेतु लेगी I  1980 के  दशक में निगम और बोर्ड काफी संख्या में सरकार द्वारा गठित की गयी जिसमें काफी संख्या में फर्ती हुई और मैथिलों की संख्या राजधानी में बढ़ी लेकिन १९९० के दशक में इंडियन नेशन प्रेस की हालत चरमराने से मैथिलों की हालत और राजनितिक पकड़ कमजोर हुई l भारतीय कला मंच ,वैदेही कला केंद्र बंद हो गयी ले देकर चेतना समिति रह गयी जहाँ पहले हार्डिंग पार्क में विद्यापति समारोह आयोजित होती थी जिसमे काफी संख्या में मिथिला के लोग सपरिवार शमिलित होते थे लेकिन बाद में सिमटता गया l  १९८१ से १९९४ तक बराबर दरभंगा आना जाना बना रहा l १९९५ में अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ पटना सेटल करने के साथ हीं इंडियन नेशन ,आर्यावर्त का पुनः प्रकाशन शुरू हुआ मैथिलों में एक उत्साह और संबल का संचार हुआ l उसी साल दरभंगा –समस्तीपुर बड़ी रेल लाइन का शुभारम्भ के बाद दरभंगा –पटना की सीधी ट्रेन सेवा शुरू हुई कमला इंटरसिटी जो सबेरे दरभंगा से चलती थी और ११ बजे पटना पहुँचती थी अभी भी करीब करीब वही समय है l दरभंगा – पटना की पुरानी सीधी बस सेवा के रूट के समान्तर हीं करीब करीब गुजरती है और बरबस पुराने सफ़र की याद दिला जाती है l   पत्नी और दो बच्चों के साथ पटना आने के बाद पहले  तारकेश्वर पथ ,चंद्वादी रोड फिर इनकम टैक्स के पास विधायक क्लब समय अपने रप्तार से गुजरने लगा बच्चो की तामिल ,गृहस्थी में समय बीतता गया महात्मा गाँधी सेतु जो एशिया का सबसे बड़ा पुल था का रिकार्ड पहले टुटा फिर टोल टैक्स ख़त्म हुई यानि पैसा वसूल फिर रुग्न  होती गयी मेरे हीं तरह l  बच्चे पटना से बहार चले गये फिर माँ बाप का साया हटा शारीर पर बीमारी का हमला चीनी तेल घी सब छुटा और रिटायरमेंट की दहलीज पर ला दिया l इस सेतु को भी उपरी स्ट्रक्चर बदलने की जरुरत आन पड़ी और पुल के भार को कम करने का कार्य विगत कुछ सालों से प्रारंभ है और पुल के ठीक नीचे से गंगा नदी पर पीपा पुल 2017 में बनाकर छोटे वाहन की आवागमन शुरू की गयी l   मैं भी सहारा खोजने का मंथन शुरू कर दिया लेकिन एक पुल के बंद होने के वक्त एक नये पुल का शुभारम्भ क्या  मेरे नये पारी को सहारा बनेगा या एक नये पीढ़ी की सपना l 

Friday, 19 May 2017

मिथिला केसरी बाबु जानकी नंदन सिंह

 ख्याति प्राप्त स्वतंत्रता सेनानी मिथिला केशरी बाबु जानकी नंदन सिंह(1905-1968) दरभंगा जिलान्तर्गत मधेपुर विधान सभा झेत्र सं १९५२ में पहिल विधायक निर्वाचित भेल रहयत l २७ जुलाई १९५२ कें पहिल बेर हुनक नेतृत्व में दरभंगा टाउन हॉल सभा में सर्वसम्मति सं प्रस्ताव स्वीकृत भेल जे भारतीय गणतंत्र क अधीन बिहार राज्य सं फराक मिथिला राज्य बनय एवं एहि राज्य में शिझा क माध्यम मैथिलि होअय l २६ जुलाई १९५३ के उक्त प्रस्ताव क कार्यान्वयन लेल दरभंगा टाउन हॉल में सभा भेल l २२ नवम्बर १९५३ कें मैथिल संघ , कोलकाता में बहुत पैघ प्रदर्शन कयलेनआ गिरीश पार्क में सभा कयलेनl एकर प्रचार प्रेस क माध्यमे बहुत भेल जाहि से तत्कालीन कांग्रेस सरकार चिंतित भ गेल l फलतः मिथिला राज्य लेल सभा प्रदर्शन क लेल कोलकाता जायत कांग्रेस पार्टी क वरिष्ठ सदस्य बाबु जानकी नंदन सिंह अओउर किछु व्यक्ति सभ कें आसनसोल टीशन पर २२ जनवरी १९५४ के गिरफ्तार क लेल गेल l वो दरभंगा जिला परिषद् क अध्यझ सेहो रहला और बिहार विधान परिषद् क सदस्य सेहो भेला l जिला परिषद् में बहुत रास लोक कल्याण क काज करोलैथ l हिनक आवास लहेरियासराय क बंगाली टोला में रहैन्ह तथा इंद्रपुर डयोढी, मधेपुर दरभंगा सम्प्रति मधुबनी जिला क निवासी छलाह l १९५७ क चुनाव में कोंग्रेस से टिकट नहि भेटला संता निर्दलीय चुनाव लडला और रनर अप रहला l  मिथिला आन्दोलन क हिनक हारि से बहुत बेसी अघात लागल l
Mithila Keshari Babu Jankinandan Singh ,First MLA of Madhaipur, Darbhanga,Who was arrested on 22Jan 1954 at Asansol Railway Station when he was in way to Kolkata to participate in a procession for curving Mithila State from Bihar. After Independent a resolution was passed in a meeting held in Darbhanga Town Hall on 27 July 1952 to create Mithila State .His Residance was at Bengali Tolla,Darbhanga. He was also the Chairman of Darbhanga District Board and done lots of welfare work and Elected Member in Bihar Legislative Council

Friday, 12 May 2017

ONLINE MAHARAJA

ज्यादे दिन की बात नहीं है जब २१ वीं शादी के प्रारंभ में सुचना तकनिकी आमलोगों की जिन्दगी बदलनी शुरू कर दी सबसे पहले सेल फ़ोन ने बातचीत करना सरल किया सुचना तकनिकी  का  रेलवे टिकेट ,बैंक लेनदेन में  प्रभाव दिखने लगा फिर सुचना तकनिकी में रोजगार के अवसर ने माध्यम वर्ग को एक बुलंदी दी तबतक सोशल मिडिया , ओनलाइन बिज़नस के आ जाने  से जैसे इस वर्ग के पंख लग गये  मिडीयोकार भी गूगल में ऊँगली कर विद्वान का कान काट रहा है l सुविधा इतनी की अपने को महाराजा से कम नहीं समझता l ऑनलाइन ट्रेन ,बस , हवाई जहाज की टिकट ली ऑनलाइन टैक्सी -ओटो बुक किया ,खाना बुक किया ,खरीदारी की जेब में कार्ड रखा चल दिये शहंशाह की तरह l कमाई के भी एक से एक ऑनलाइन तरीका l  . अब तो हर काम सरलता से बैठे बैठे हो रहा है लेकिन सबसे बुरे दिन आ गये अनपढ़ का अब उन्हें अपने अशिझित होने का एहसास ज्यादा सालता है जब उनका छोटा मोटा रोजगार भी ऑनलाइन करके शिझित वर्ग ले जा रहे हैं जो ऑनलाइन होना चाहता है ठगी का शिकार हो कर जमा पूंजी गवां बैठता है l अशिझित बात कर सकता है ,फोटो ले सकता है ,गाना सुन सकता ,फिल्म देख सकता है लेकिन उत्थान नहीं l संबिधान ने प्राथमिक शिझा अनिवार्य की थी लेकिन ७०  साल में इसे गंभीरता से नहीं लिया गया l  

Thursday, 11 May 2017

पेड़ों के झुरमुट के  बीच सड़क  से गुजरना मुझे बहुत पसंद है साथ में फूलों की खुशबु और रंगबिरंगे फूल खिले हों तो मुझे स्वर्गिक आनंद मिलता है l   मौसम खुशगवार हो बगल में सुसज्जित आशियाना हो तो लगता है यहीं अपना ठिकाना बना लूँ l   ऐसे सुहाने वातावरण में शांति से  कुछ लिखूं पढूं और आभासी दुनिया से जुड़ा रहूँ l बस यही चाहत हैl  कभी अपने गाँव या शहर दरभंगा में कुछ ऐसा हीं शकुन था लेकिन अब कहाँ !
 गाँव को तो जैसे किसी की नजर लग गयी लोग भी अब गाँव छोड़ कर पलायन कर रहे हैं आवश्यक सुविधा का नितांत आभाव है न शिझा की अच्छी व्यवस्था , न स्वास्थ्य ,न मनोरंजन ,न खेती ,न पानी  ऊपर से बाढ़ का खतरा फिर किसी का मन क्यों लगे ! अपना शहर कभी सुन्दर था लेकिन अब तो केवल भीड़ ,जलजमाव l  हरियाली तो दिखती नहीं l
एक आध वर्ष में सेवानिर्वित हो जाऊंगा l रोजी- रोटी और परिवार के निर्वहन   में इस बुरीतरह उलझा रहा कि पढने लिखने के अपने शौक को रिटायरमेंट के बाद शकुन से करने का सोच रखा हूँ l बस अभ्यास बना रहे इसलिए डैयरी लिखने की आदत बना रखा है l  लैपटॉप लेने के बाद कुछ कुछ सोशल मिडिया पर लिख देता हूँ कभी कभी अखवार में भी कुछ लिख कर भेज देता हूँ और छप भी जाता है l  लेकिन तन्मयता जब बनती है तो दुसरे काम  रह जाते हैं l पूरी तरह रचनात्मक कार्य पर समय नहीं दे पाता l     मुझे  एक साथ भागमभागी में सब काम करना नहीं भाता l मै हमेशा अपने को पढाई लिखाई में प्राथमिक विद्यालय का छात्र मानता हूँ और मुझे अभी बहुत कुछ सीखना है l पूरी तरह नौसिखुआ हूँ मैं l इसी डर से    कभी कभी ऑनलाइन बिज़नस का भी सोचता हूँ क्योंकि एक अच्छी जिन्दगी के लिए रूपये पैसे का होना जरुरी है दूसरी मुझे व्यापार का तजुर्बा और पढाई भी है lआप कह सकते हैं कि यह मेरा दूसरा शौक रहा है यदि मेरे पास घर चलाने के पैसे रहे होते  तो पढाई के बाद मैं व्यापार में उतरता l अब मै आप मित्रों पर छोड़ता हूँ कि आप मार्गदर्शन करें l
  

Monday, 4 May 2015

सोशल इंजीनियरिंग
यह शब्द शब्द आजकल राजनीति सच कहें तो वोट बैंक पॉलिटिक्स का मुख्य तकनिकी है जिसे समाजवादियों ने जाना .इससे पहले भी इसका चलन था लेकिन खुलकर नहीं . कांग्रेस का वोट बैंक दलित ,मुसलमान और उच्च जाति का था और इसी सोशल इंजीनियरिंग के बदौलत कई दशक तक सत्ता पर काबिज रही .मुसलमान का मोहभंग होने पर उसका झुकाब समाजवादियों के तरफ गया फिर समाजवादियों में बिखराव होने के बाद वोट बैंक बनाने के लिए इस इंजीनियरिंग का प्रयोग का आम चलन हो गया . माय का  उद्घोष के बाद उसके तोड़ हेतु कोई  बाप का घोषणा करता लेकिन तकनिकी कोई मिल नहीं पा रहा था तभी ओबीसी ,पसमिन्दा,महादलित का  गढ़जोर पर आकर मामला हल होते दिखा लेकिन इसकी हवा निकल गयी अब फिर कमोबेस माय का समीकरण .सोशल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर का कहना है कि निकट भविष्य में एक नये समीकरण की खोज सामने आयेगी .वह होगा वंचित और शोषित समाज यानि जिन्हें देश के आज़ादी के बाद उलाहना देते हुए सरकार से  वंचित रखने का प्रयास हुआ वे जो भी आगे बढे अपनी  किस्मत से.l वहीँ शोषित समाज यानि मध्यम वर्ग जिससे टैक्स तो असुला जाता है लेकिन कोई सुबिधा नहीं मिलती . सुविधा के लिए अतरिक्त सुविधा शुक्ल अपनी खर्च में कटौती कर देनी पड़ती है .

Saturday, 7 February 2015

Political Crisis in Bihar

Bihar CM Jitan Ram Manjhi Cabinet recommend to desolve the assembly 21 Minister were against & 7 are in favor.This resolution bring by Narendra Singh .Birshen Patel .Sahid Ali Khan. Nitish Mishra.Binay Bihari. Mahachandra Prasad Singh .Bhim Singh were in favour.Smarat Choudhry.

Saturday, 17 January 2015



भारत के रक्षा मंत्री श्री मनोहर पर्रिकर  ने देश में निर्मित हल्का लड़ाकू विमान वायु सेना को सुपुर्द करने पर हम सभी गौरवान्वित मह्शूस करते हैं। भारत चीन- युद्ध में भी दरभंगा एविएशन ने अपनी विमान देश को सौंपा था  आज एकवार  फिर  भारत के लाईट कॉम्बेट एयरक्राफ्ट 'तेजस' बनाने के प्रोजेक्ट डायरेक्टर तथा एयरोनौटिकल डेवलपमेंट एजेंसी के पूर्व निदेशक, श्री  मानस बिहारी    वर्मा  जो अवकाश प्राप्त करने के बाद दरभंगा में रहते हैं को अपने  बीच पाकर हम   गौरवान्वित हैं।  वे राष्ट्रपति कलाम के पूर्व सहकर्मी तथा मित्र रहे हैं तथा अभी कलाम के एन जी ओ 'विकसित भारत फौंडेशन' के माध्यम से दरभंगा, मधुबनी तथा सुपौल के ग्रामीण क्षेत्रों में कक्षा ६ से १२ में पढने वाले बच्चों में विज्ञान की शिक्षा के प्रचार प्रसार हेतु काम कर रहे हैं। इस कार्य हेतु वे तीन मोबाइल साइंस लैब तथा छह इंस्ट्रक्टर की मदद लेते हैं। वे महाराजा कामेश्वर सिंह  कल्याणी फाउंडेशन से भी जुड़े हैं।कुछ महीने पूर्व फाउंडेशन के तरफ से मूक और वधिर विद्यालय ,कामेश्वरी प्रिया पुअर होम में कम्बल  वितरित करते हुए हम उन्हें  देख चुके हैं। महाराजा कामेश्वर सिंह की जन्मदिन समारोह में भी वे डा. बिन्देश्वर पाठक जी के साथ समारोह में उपस्थित थे।  

Thursday, 15 January 2015

RAJNEGAR.

१९३४  के भूकम्प की सबसे बड़ी त्रासदी राजनगर ने हीं झेला। भारत के हिन्दू राजा -महाराजों के अध्यात्मिक गुरु दरभंगा के   महाराजाधिराज एवं भारत के महान साधक द्वारा कमला नदी के किनारे मंदिरों और तालाबों से युक्त शानदार महलें जिसकी एक -एक ईंट हिन्दू वैभव को दर्शाता था  ताश के महल की तरह धराशाई हो गयी। मुख्य  महल में प्रवेश दुर्गा हॉल  होकर था जिसमे  दुर्गाजी की सुन्दर संगमरमर  मूर्ति थी ,शानदार दरवार हॉल था उससे सटे ड्राइंग रूम उत्तर में गणेश  भवन। महल का सबसे पुराना हिस्सा बड़ा कोठा कहलाता था। मंदिर के तरफ शिव मंदिर जो की दक्षिण भारतीय मॉडल  का था ,उसीतरह सूर्य मंदिर ,सफ़ेद संगमरमर की काली मंदिर जिसके जैसा पुरे प्रान्त में  नहीं था ,अर्धनारीश्वर मंदिर ,राजराजेश्वरी मंदिर ,गिरजा मंदिर। कंपाउंड से बाहर सचिवालय बिल्डिंग।  नदी के किनारे सुन्दर पक्का घाट। महाराजा रामेश्वर सिंह ने अपने इस ड्रीम लैंड में करोड़ों रुपये से अधिक पौराणिक कला और संस्कृति को दर्शाने के लिए खर्च किये थे। देश के बिभिन्न कोने से आनेवाले इस स्वर्गिक जगह को देखकर प्रशंषा करते नहीं थकते थे। १५ जनबरी १९३४ के दोपहर २ बज कर ४५ मिनट पर यह सपना सा हो  गया।अभी भी इसके मंदिर और भग्नावशेष देखते हीं बनता है। मधुबनी जिला मुख्यालय से राजनगर सड़क मार्ग से जुड़ा है । 





Friday, 9 January 2015

Century Year of Gandhi arrival in Bihar

Gandhiji came Bihar on 9 Jan.1915 from Calcutta by  train and atop at Bankipur station.Stay on the House of Maulana Majhrul Haque at Frasar Road from there they left for Motihari.
Add Mahatma Gandhi with Maharajadhiraj Dr. Sir Kameshwar Singh at Darbhanga.

Thursday, 19 December 2013

Right to Recall

दिल्ली में आम आदमी पार्टी और उसे मिला   समर्थन जिसने  भारतीय जनता पार्टी को सबसे बड़े पार्टी बनने  के बाद भी जहाँ  सरकार बनाने से न बल्कि रोक दी साथ हीं कोंग्रेस को चुनाव में भारी  शिकस्त दी ,फिर कोंग्रेस ने बिना शर्त समर्थन देकर आप को सत्ता लेने की पेशकस कर दी ऐशी स्थिति में जिस तरह जनता से रेफरेंडम लेने की  नयी तरीका आप द्वारा अपनायी जा रही है मुझे उम्मीद है कि कल को हो कर रेफरेंडम लेने का यही तरीका राईट टू  रिकॉल का मार्गप्रशस्त करेंगे जिसकी मांग कभी जय प्रकाश नारायण जी ने कही थी। राईट टू रिकॉल  किस तरह कार्यरूप में आ पायेगा इस पर राजनितिक विद्वानो   में  भी चिंतन रहा है  साथ ही यह  आमजन के मानस में भी है ।आज भले हीं  यह अटपटा लग रहा हो लेकिन पहली बार किसी राजनितिक दल ने निर्णय लेने की  प्रक्रिया में जनता को चुनाव वा सरकार बनाने के अतरिक्त  सहभागी बनाया है. प्रजातंत्र में जनता की सहभागिता  पांच  साल में एकवार का इवेंट नहीं है। सुचना क्रांति के इस युग में प्रभावकारी ई - गवर्नेस आनेवाले दिनों में प्रभावकारी रहेंगे।  राजनितिक पंडित भी मानते रहे हैं कि  लिए जाने  वाले निर्णय में लोगों को भी सहभागी बनाया जाय   जो कोशिश कर रहे हैं उनका उपहास उचित नहीं होगा । हमें नहीं भूलना चाहिए कि पहलीवार १९७७ में  आमलोगों के बीच शपथ समारोह कि गयी ,फिर कुछ सरकारें ने कैबिनेट कि मीटिंग राज्य मुख्यालय से बहार की ,लालू प्रसादजी खेत और खलिहान में संसद कि बात कर रहे है और श्री राजीव गांधी ने कुछ दिन पहले जनता से जोड़ने कि बात कही है यह सभी यह दर्शाता है कि प्रजातंत्र में जनता से नजदीकी स्थापित होना जरुरी है यह संपर्क निरंतर हो मात्र पांच  साल में एकवार का न हो।  

Wednesday, 18 December 2013

जनप्रतिनिधियों का जनता से जुड़ा रहना जरुरी है तभी वे जनता कि समस्याओं और बेहतरी के लिए  उसे  सरकार के नजर में  ला सकते हैं और सच्चे जनप्रतिनिधि का फर्ज निभा सकते हैं , अब वेतन भोगी जनप्रतिनिधियों को जवाबदेह होना है इसके लिए साल में कम-से कम १०० दिन अपने क्षेत्र में रहना ,जनसम्पर्क कर लोगों कि समस्या को देखना और सुनना ,इन समस्याओं के समाधान हेतु स्थानिय  प्रशासन से मिलना आदि साथ ही अपने वेबसाइट पर किये गये कार्यों को अपडेट करना और सीधे और fb के माध्यम से जनता के संपर्क में रहना जरुरी है ,आमजन अब वेतन और सुबिधाभोगी प्रतिनिधियों का कार्य देखना चाहती है ,सभी दल को इसे सुनिश्चित करना चाहिए तभी लोगों का विश्वास  राजनितिक दलों पर मजबूत होगा।

Monday, 12 August 2013

कल  नागपंचमी है उसदिन  नाग देवता की पूजा की जाती हैl  नागनाथ सांपों के राजा  हैं धरती के  सबसे विषैला जीव का राजा ! इनका डंसा पानी भी नहीं मांगता l  भला ऎसे  जीव की पूजा अर्चना से ही प्राणी की रझा हो सकती है उन्हें नागपंचमी के दिन दूध -लावा देकर प्रसन्न करते हैं हमलोग l  सांप  देवता हम लोगों की पूजा स्वीकार करते हैं और रझा करते हैं l हे नागदेवता ! हमें हमारे नागनाथ और सांपनाथ से रझा  करना प्रभु !!

Friday, 9 August 2013

ईद मुबारक

                                     ईद मुबारक

आज ईद है ,सबेरे उठ  कर फेसबुक खोला और अपने कुछ मित्रों को ईद का मुबारकवाद  दिया ,मेसेज देखा मेरे बचपन के एक मित्र का था फिर दोनों मित्र मोबाइल पर काफी देर तक बातें की वे रात में ही भारत आये हैं जानकर ख़ुशी हुई कि  वे कुछ ही वर्षों में अपने गाँव /होम टाउन में आकर खेतीवारी  करेंगे ,खेती में उन्हें काफी अनुभव है और देश -विदेश की खेती को नजदीक से देखने   और खुद का भी फार्म का अनुभव है l  मैंने भी शीघ्र गाँव /होम टाउन  जाने की मंशा जतायी  उन्होंने प्रसन्नता दिखाते हुए साथ साथ गाँव में खेतीवाड़ी  करने का भरोसा दिलाया मुझे जैसे लगा कि मेरी मुराद मील  गई सही में मुझे तो ईद का चाँद मील  गया l

Friday, 26 July 2013

FOODY

वाह !  किया खाना है मजा आ गया !! भाई पुत्र की प्राप्ति पर बधाई हो ,बधाई हो लक्ष्मी जी का आगवान हुआ है ,भोज देना पड़ेगा ,समधी जी बारात का स्वागत दिल खोल कर कीजियेगा या फिर यह सुनते हैं की डील हो जायेगा तो पार्टी देंगे , अरे खिलाओ काम हो जायेगा यानि बिना भोज ,खाना ,पार्टी का कुछ नहीं होता क्योंकि आदमी का सबसे प्यारा फ़ूड  है और जरुरत भी . हम सभी फूडी हैं l किसी के आत्मा की प्रसन्नता अच्छे भोजन से ही मिलती है l हर अवसर पर दिल खोल कर खायें और खिलाएं lमैं तो कहूँगा कि खिलाने का अवसर बनायें l भूखे को भरपेट ,पंडित को दही - मिठाई पवित्र पूर्वक खिलाने से पुन्य की प्राप्ति होती है l कोई भी आयोजन  भोजन के बिना सम्भव नहीं है ,मनुष्य को सबसे ज्यादे संतुष्टि भोजन से ही मिलती है ,भोजन मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं मांसहारी और शाकहारी  l दोनों रहे और भोज के उतर्राध्य में दही ,मिठाई ,आम ,अमावट,खीर /पायस,शिरखंड,केला और अंत में आइसक्रीम  हो तो फिर कहना ही किया l हमारी दिनचर्या नाश्ते से शरू होकर ,लंच ,स्नैक ,डिनर और सपर यानि जागने से लेकर सोने तक खाने की पूरी रुटीन हीं तो है lआप  यदि अच्छे मेजवान हैं और दुसरे को खिलाने का तरीका और सलिका जानते हैं तो आप सबसे सफल होंगे lपूरे विश्व में खाने का कारोबार से बड़ा कोई कारोवार नहीं होता l आजकल यह चर्चा है कि  ५ से १२ रुपये में भरपेट भोजन मिल सकता है भाई भारत जैसे देश में इसमें अचरज किया है यदि आप सामाजिक प्राणी हैं दुसरे के ख़ुशी और दुःख में शामिल रहते हैं तो आप बिना पैसा खर्च के छक कर भोजन कर सकते हैं ये भारत देश है जहाँ हर अवसर पर भोज खिलने की प्रथा है l