Friday, 12 May 2017

ONLINE MAHARAJA

ज्यादे दिन की बात नहीं है जब २१ वीं शादी के प्रारंभ में सुचना तकनिकी आमलोगों की जिन्दगी बदलनी शुरू कर दी सबसे पहले सेल फ़ोन ने बातचीत करना सरल किया सुचना तकनिकी  का  रेलवे टिकेट ,बैंक लेनदेन में  प्रभाव दिखने लगा फिर सुचना तकनिकी में रोजगार के अवसर ने माध्यम वर्ग को एक बुलंदी दी तबतक सोशल मिडिया , ओनलाइन बिज़नस के आ जाने  से जैसे इस वर्ग के पंख लग गये  मिडीयोकार भी गूगल में ऊँगली कर विद्वान का कान काट रहा है l सुविधा इतनी की अपने को महाराजा से कम नहीं समझता l ऑनलाइन ट्रेन ,बस , हवाई जहाज की टिकट ली ऑनलाइन टैक्सी -ओटो बुक किया ,खाना बुक किया ,खरीदारी की जेब में कार्ड रखा चल दिये शहंशाह की तरह l कमाई के भी एक से एक ऑनलाइन तरीका l  . अब तो हर काम सरलता से बैठे बैठे हो रहा है लेकिन सबसे बुरे दिन आ गये अनपढ़ का अब उन्हें अपने अशिझित होने का एहसास ज्यादा सालता है जब उनका छोटा मोटा रोजगार भी ऑनलाइन करके शिझित वर्ग ले जा रहे हैं जो ऑनलाइन होना चाहता है ठगी का शिकार हो कर जमा पूंजी गवां बैठता है l अशिझित बात कर सकता है ,फोटो ले सकता है ,गाना सुन सकता ,फिल्म देख सकता है लेकिन उत्थान नहीं l संबिधान ने प्राथमिक शिझा अनिवार्य की थी लेकिन ७०  साल में इसे गंभीरता से नहीं लिया गया l  

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