Thursday, 11 May 2017

पेड़ों के झुरमुट के  बीच सड़क  से गुजरना मुझे बहुत पसंद है साथ में फूलों की खुशबु और रंगबिरंगे फूल खिले हों तो मुझे स्वर्गिक आनंद मिलता है l   मौसम खुशगवार हो बगल में सुसज्जित आशियाना हो तो लगता है यहीं अपना ठिकाना बना लूँ l   ऐसे सुहाने वातावरण में शांति से  कुछ लिखूं पढूं और आभासी दुनिया से जुड़ा रहूँ l बस यही चाहत हैl  कभी अपने गाँव या शहर दरभंगा में कुछ ऐसा हीं शकुन था लेकिन अब कहाँ !
 गाँव को तो जैसे किसी की नजर लग गयी लोग भी अब गाँव छोड़ कर पलायन कर रहे हैं आवश्यक सुविधा का नितांत आभाव है न शिझा की अच्छी व्यवस्था , न स्वास्थ्य ,न मनोरंजन ,न खेती ,न पानी  ऊपर से बाढ़ का खतरा फिर किसी का मन क्यों लगे ! अपना शहर कभी सुन्दर था लेकिन अब तो केवल भीड़ ,जलजमाव l  हरियाली तो दिखती नहीं l
एक आध वर्ष में सेवानिर्वित हो जाऊंगा l रोजी- रोटी और परिवार के निर्वहन   में इस बुरीतरह उलझा रहा कि पढने लिखने के अपने शौक को रिटायरमेंट के बाद शकुन से करने का सोच रखा हूँ l बस अभ्यास बना रहे इसलिए डैयरी लिखने की आदत बना रखा है l  लैपटॉप लेने के बाद कुछ कुछ सोशल मिडिया पर लिख देता हूँ कभी कभी अखवार में भी कुछ लिख कर भेज देता हूँ और छप भी जाता है l  लेकिन तन्मयता जब बनती है तो दुसरे काम  रह जाते हैं l पूरी तरह रचनात्मक कार्य पर समय नहीं दे पाता l     मुझे  एक साथ भागमभागी में सब काम करना नहीं भाता l मै हमेशा अपने को पढाई लिखाई में प्राथमिक विद्यालय का छात्र मानता हूँ और मुझे अभी बहुत कुछ सीखना है l पूरी तरह नौसिखुआ हूँ मैं l इसी डर से    कभी कभी ऑनलाइन बिज़नस का भी सोचता हूँ क्योंकि एक अच्छी जिन्दगी के लिए रूपये पैसे का होना जरुरी है दूसरी मुझे व्यापार का तजुर्बा और पढाई भी है lआप कह सकते हैं कि यह मेरा दूसरा शौक रहा है यदि मेरे पास घर चलाने के पैसे रहे होते  तो पढाई के बाद मैं व्यापार में उतरता l अब मै आप मित्रों पर छोड़ता हूँ कि आप मार्गदर्शन करें l
  

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