Friday, 9 June 2017

दो पुल की कहानी

 महात्मा गाँधी सेतु उत्तर और दझिन बिहार की लाइफ लाइन कही जाती है अब अपने नये रूप में अवतरित होने की बाट देख रही है वहीँ गंगा नदी पर दीघा – सोनपुर पुल ( जे . पी , सेतु ) से जहाँ रेल सेवा वर्ष २०१५ में प्रारंभ है और एक नये रेलवे स्टेशन पाटलिपुत्र का शुभारम्भ हो चुकी है उक्त रेल सह सड़क पुल से दिनक ११. ०६ .२०१७ को सड़क आवागमन प्रारंभ की जा रही है इसके शुभारम्भ के साथ महात्मा गाँधी सेतु का आवागमन पुल के नये अवतार होने तक बंद हो जायेगा यानि  जे पी सेतु बनकर तैयार है गाँधी सेतु का  स्थान लेने  l गाँधी के बिहार आगमन के शताब्दी वर्ष में महात्मा गाँधी सेतु जो कभी भारत का सबसे बड़ा सड़क पुल था की पुरानी काया यानि पाया पर उपरी संरचना बदलने की प्रक्रिया तेज होगी और उसी तरह हम भी पटना से अपनी गृहस्थी को बदलने और सेवानिर्वृति के बाद एक नये जीवन का शुरुआत होगी l दो पुलों के दरम्यान पटना के कई पुराने चीज स्मृति में हीं रहेंगें बांकीपुर जेल ,नूतन राजधानी के कई बंगले के स्थान पर दिखेंगें संग्राहलय , बुद्धा स्मृति पार्क l ,विधायक फ्लैट –क्लब ,पटेल पथ ,आर .ब्लाक के स्थान पर नये फ्लैट l पुराने अवशेष जमींदोज हो गये l स्टीमर सेवा के समय अशोक राज पथ का एक अलग शान हुआ करता था नये पुल के शुभारम्भ से फिर इस पथ की रौनक बढ़ेगी l पुरानी पटना के स्मृति चिन्ह गोलघर को देखकर पुराने लोग अपनी स्मृति में जहाँ गोते लगायेंगें तो दरभंगा हाउस ,पटना कॉलेज- विश्वविद्यालय बिहार राज्य  के निर्माण की कहानी कहेगी l दो पुलों के शुभारम्भ जहाँ एक पीढ़ी के  अवसान को दिखाती है वहीँ एक नई पीढ़ी की  उत्थान की कहानी है जिसमे कॉफी हाउस और ब्रिटिश लाइब्रेरी अपनी अहमियत खो चुकी I  ये दोनों पुल दो  पीढ़ी की कहानी है  
     मैं १९८१ में MBA की पढाई के लिए पटना आ गया उसके अगले साल शादी हो गयी l महात्मा गाँधी सेतु का शुभारम्भ ठीक उसी साल मई १९८२  को  हुआ l  देश की प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी ने इस पुल का लोकार्पण हाजीपुर साइड में की जिसमे दरभंगा से भी बसों और अपने वाहन से कांग्रेसी कार्यकर्त्ता शरीक हुए जिसमे मेरे पिताजी( जो युवक कांग्रेस के सदस्य थे ) भी थे  और दरभंगा से पटना आना सुगम हो गया पहले पहलेजा से स्टीमर से मेहंद्रू घाट या बांस घाट पर  उतारते  थे l वर्षा के मौसम में गंगा नदी में पानी का प्रवाह तेज रहने से कभी कभी स्टीमर सेवा स्थगित हो जाती थी l  दरभंगा से ट्रेन से समस्तीपुर ,बछवारा , होते हुए सोनपुर से पहलेजा तक की ट्रेन से काफी समय लगता था  या दरभंगा से मुजफ्फरपुर होकर बस से फिर स्टीमर से पटना या दरभंगा से बरौनी –मोकामा होते हुए बस सेवा से l अपने शहर से दूर रहने से पटना के प्रति एक आकर्षण होता था पटना विश्विद्यालय या कॉलेज का काफी नाम हुआ करता था पटना के शत्रुघन सिन्हा अपनी पहचान बॉलीवुड में जमा चुके थे उस समय और पटना से घर जाने पर एक अलग भाव मिलता था लोगों से l पटना से दरभंगा का बस भाडा २५ रूपये हुआ करता था जो गाँधी सेतु बनने  के बाद सिर्फ १६ रूपये हो गये l एक तो पुल बनने से आवागमन की सुबिधा दूसरा मिथिलांचल के मुख्यमंत्री रहने से फ्रेजर रोड के होटल गलियारा के होटलों में काफी भीड़ रहती थी खासकर मिथिलांचल के लोगों की l  रहती भी क्यों नहीं फ्रेजर रोड पर दरभंगा राज का इंडियन नेशन प्रेस जिससे प्रदेश का अग्रणी  हिंदी और अंग्रेजी दैनिक  अखवार आर्यावर्त ,और  इंडियन नेशन और मैथिलि  पत्रिका मिथिलामिहिर का प्रकाशन होता था बगल में हीं एक बड़ी कई एकड़ में फैले कैंपस में चलता था और उसके  बगल में रसगुल्ला के लिए मसहुर पिंटू रेस्टोरंट l दरभंगा के लिए डायरेक्ट प्राइवेट बस BRC -२२ लाइट कार्नर वर्तमान हरिहर काम्प्लेक्स के पास से खुलती थी फिर एक बस बढ़ी थी शायद संगीत सजनी नाम था l उसी दशक में महावीरजी स्थान ,पटना जं का कर सेवा द्वारा भव्य मंदिर का निर्माण हुआ l  
इस पुल से काफी संख्या में बसों का  आवागमन शुरू होने से एक नये बायपास और बस स्टैंड पहले हार्डिंग पार्क फिर मीठापुर कृषि फार्म में हस्तांतरित हुआ इसी दशक में गृह ऋण सुलभ हुई और  मल्टीस्टोरी बिल्डिंग बनना शुरू हुआ , गाँधी मैदान के पास बिस्कोमान टावर पहले सबसे बड़ा था l कबूतर खाना यानि ऑफिसर फ्लैट का भी नाम लिया जा सकता है लेकिन यमुना अपार्टमेंट ,उदयगिरी के निर्माण से नये मल्टीस्टोरी अस्सी के दशक में अस्तित्व में आये l अशियानानगर कॉलोनी प्राइवेट सेक्टर में पहला कॉलोनी बना l
 अब पटना अपना रफ़्तार पकड़ चुकी थी डाक बंगला के जगह लोक नायक भवन ,गाँधी मैदान में गाँधी की भव्य मूर्ति , प्लाटोरियम (तारामंडल ), मोर्यलोक बाजार परिसर , बिस्कोमान की नई टावर जो ऊँची बिल्डिंग में अभी भी अपना स्थान बनाये हुआ है l महात्मा गाँधी सेतु के शुभारम्भ के समय हीं गाँधी नाम की अंग्रेजी फिल्म की बहुत नाम हुआ था जिसमे पटना की नूर फातिमा ने भी रोल की थी वह बिस्कोमान की कर्मी थी l यह एक संयोग है कि इस साल जब हम माहात्मा गाँधी के बिहार यात्रा का शताब्दी वर्ष मना रहे है उसी दौरान रुग्न हो चुके महात्मा गाँधी सेतु पर आवागमन बंद कर उसके उपरी संरचना का कार्य प्रारंभ होगा और उसकी जगह जे। पी  सेतु लेगी I  1980 के  दशक में निगम और बोर्ड काफी संख्या में सरकार द्वारा गठित की गयी जिसमें काफी संख्या में फर्ती हुई और मैथिलों की संख्या राजधानी में बढ़ी लेकिन १९९० के दशक में इंडियन नेशन प्रेस की हालत चरमराने से मैथिलों की हालत और राजनितिक पकड़ कमजोर हुई l भारतीय कला मंच ,वैदेही कला केंद्र बंद हो गयी ले देकर चेतना समिति रह गयी जहाँ पहले हार्डिंग पार्क में विद्यापति समारोह आयोजित होती थी जिसमे काफी संख्या में मिथिला के लोग सपरिवार शमिलित होते थे लेकिन बाद में सिमटता गया l  १९८१ से १९९४ तक बराबर दरभंगा आना जाना बना रहा l १९९५ में अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ पटना सेटल करने के साथ हीं इंडियन नेशन ,आर्यावर्त का पुनः प्रकाशन शुरू हुआ मैथिलों में एक उत्साह और संबल का संचार हुआ l उसी साल दरभंगा –समस्तीपुर बड़ी रेल लाइन का शुभारम्भ के बाद दरभंगा –पटना की सीधी ट्रेन सेवा शुरू हुई कमला इंटरसिटी जो सबेरे दरभंगा से चलती थी और ११ बजे पटना पहुँचती थी अभी भी करीब करीब वही समय है l दरभंगा – पटना की पुरानी सीधी बस सेवा के रूट के समान्तर हीं करीब करीब गुजरती है और बरबस पुराने सफ़र की याद दिला जाती है l   पत्नी और दो बच्चों के साथ पटना आने के बाद पहले  तारकेश्वर पथ ,चंद्वादी रोड फिर इनकम टैक्स के पास विधायक क्लब समय अपने रप्तार से गुजरने लगा बच्चो की तामिल ,गृहस्थी में समय बीतता गया महात्मा गाँधी सेतु जो एशिया का सबसे बड़ा पुल था का रिकार्ड पहले टुटा फिर टोल टैक्स ख़त्म हुई यानि पैसा वसूल फिर रुग्न  होती गयी मेरे हीं तरह l  बच्चे पटना से बहार चले गये फिर माँ बाप का साया हटा शारीर पर बीमारी का हमला चीनी तेल घी सब छुटा और रिटायरमेंट की दहलीज पर ला दिया l इस सेतु को भी उपरी स्ट्रक्चर बदलने की जरुरत आन पड़ी और पुल के भार को कम करने का कार्य विगत कुछ सालों से प्रारंभ है और पुल के ठीक नीचे से गंगा नदी पर पीपा पुल 2017 में बनाकर छोटे वाहन की आवागमन शुरू की गयी l   मैं भी सहारा खोजने का मंथन शुरू कर दिया लेकिन एक पुल के बंद होने के वक्त एक नये पुल का शुभारम्भ क्या  मेरे नये पारी को सहारा बनेगा या एक नये पीढ़ी की सपना l 

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