EVIL OF BLACK MONEY
राघव संस्कारी और होनहार विद्यार्थी था ,उसने कॉमर्स से स्नातक और एम् बी ए करने के बाद शीर्ष सहकारी संस्था में नौकरी कर रहा था उक्त संस्था में काफी उपरी आमदनी थी लेकिन उसे रास नहीं था उसका मानना था कि संस्था को फायदा करने में ही सबकी फायदा है ओ संस्था की बिक्री बढ़ाने में लगा रहता था और गलत काम का विरोध करता था जिसके कारण उसकी नौकरी नियमित नहीं की गयी ,तीन वर्ष काम करने के बाद उसे संस्था से सेवामुक्त कर दिया गया उसने राहत की साँस लिया उसे अपने पर पक्का भरोसा था की बिज़नस से वह जब चाहे पैसा कम सकता था लेकिन उसे यह पसंद नहीं था कम्पनीज एक्ट ,मैनेजमेंट ,एकाउंटिंग पर काफी पकड़ थी उसकी बारीकी को वह समझता था.उसने अपने एक मित्र को हार्ट इञ्जिकोन प्राइवेट लि तथा एक अन्य मित्र को एग्री लाइन प्रोडक्ट लि नाम की कम्पनी का निबंधन करवा कर काम करने को कहा और खुद नौकरी की तलाश करता रहा उसे खाद की एक बड़ी कंपनी में नौकरी मिली लेकिन यह नौकरी भी ज्यादे नहीं चला वह पुन : बेरोजगार हो गया पत्नी को घर चलने में काफी दिक्कत उठानी पड़ती थी ,बच्चे बड़े हो रहे थे खर्च बढ़ रहा था उसने कुछ लड़के को पढ़ा कर जो उनसे मिलता काम निकाल रहा था लेकिन कब तक ऐसा चलता l पत्नी द्वारा हमेशा पैसा पैसा करने से वह विवश हो कर खुद का एक कंपनी खोला शेयर के द्वारा पूंजी एकत्र किया ,कंपनी पहले साल २ लाख का शुद्ध लाभ अर्जित की। दुसरे साल १0 लाख,तीसरे साल २५ लाख चौथे साल १ करोड़ पांचवे साल १० करोड़ लेकिन अकाउंट में शुद्ध लाभ कम दिखा कर उसने अबतक ५ करोड़ खुदका बना लिया जिससे उसने अपना मकान ,गाड़ी ,पत्नी के लिय जेवरात ,सुख-सुबिधा जुटा ली अब उसे किसी चीज की जरुरत नहीं रही , एक आदमी की जरुरत किया है अच्छा खाना , ड्रेस , सुसजित घर l ब्लैक मनी की यह त्रासदी है की उसकी कोई उत्पादकता नहीं होती यह गलत काम में ही लगता है यह राघव समझता था l उसके बच्चे किशोर अवस्था में आ गये उन्हें किसी चीज की कमी नहीं थी ,कार से कॉलेज जाना ,दोस्तों के साथ सैर सपाटा मौज मस्ती ,।घर में कडोर रूपये रहते थे उसे बच्चे के अत्यधिक खर्च को देखकर संतोष होता कि किसी तरह काला पैसा निकल तो रहा है , बच्चे सबसे महंगे ब्रांड के ड्रेस ,महंगे रेस्तरा में खाना ,हवाई सफ़र सैर सपाटा पूरी तरह आधुनिक / मौड हो गये , राघव को कब डैड कहने लगे उसे भी नहीं पत्ता चला जब उसने गौर किया तबतक काफी वर्ष हो चुके थे एक दिन राघव विदेश से घर लौट रहा था वह पुराने दिन में चला गया पैसा ने कैसे उसके बच्चों को बदल दिया उसने राहत महसूस किया की पत्नी तो वही है यानि हमारे हीं ज़माने की संस्कार में पली बढ़ी अपने नाते रिस्तेदारों से प्रेम -संपर्क रखनेवाली , अपने पर्व त्यौहार पारंपरिक तरीके से माननेवाली , कुल देवी की पूजा अर्चना करनेवाली हमारे हर भाव को समझने वाली यानि बेटा = बेटी में जो पीढ़ी का अंतर है या अति आधुनिकता दिख रही है वह अंतर अर्धांग्नी के साथ नहीं आएगी यह सोच कर राघव का मन शांत हुया और वह एयरपोर्ट से घर पहुंचा सामने पत्नी पर नजर गयी एक नजर में पहचान नहि सका की उसकी पत्नी ही है उसके लम्बे बाल के जगह बॉब कट बाल , जीन्स - टी शर्ट में देखकर वह दंग रह गया ब्लैक मनी ने पत्नी को भी बदल कर रख दिया वह विचलित होकर लौन में कुर्सी पर बैठ गया और पत्नी से एक गिलास पानी लाने को कहा पत्नी ने पास रखे कॉल बेल की रिमोट दबाई और नौकर पुरे यूनिफार्म में अदब से हाजिर हुआ पत्नी ने पानी लाने को हुकुम दी नौकर एक ट्रोल्ली में कई गिलास ,जग ,मिनरल वाटर का बोतल लेकर लॉन की ओर बढ़ रहा था और उधर राघव पत्नी के मोड होने के सदमे में भीतर भीतर उबल रहा था सोच रहा था कि ब्लैक मनी ने पानी को भी सजावट के तरह पेश कर रहा है जैसे हीं ट्रौली नजदीक आया उसने उस पर लात से ठोकर मार दी l शीशा का गिलास - जग सब चकनाचूर हो गया पत्नी संयत भाव में नौकर से कहती है कि दूसरा ट्राली ले आओ और बाजार से एक कार्टून ग्लास और जग ले आना l राघव के आक्रोश को समझनेवाला अब कोई नहीं रहा l
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