दिल्ली में आम आदमी पार्टी और उसे मिला समर्थन जिसने भारतीय जनता पार्टी को सबसे बड़े पार्टी बनने के बाद भी जहाँ सरकार बनाने से न बल्कि रोक दी साथ हीं कोंग्रेस को चुनाव में भारी शिकस्त दी ,फिर कोंग्रेस ने बिना शर्त समर्थन देकर आप को सत्ता लेने की पेशकस कर दी ऐशी स्थिति में जिस तरह जनता से रेफरेंडम लेने की नयी तरीका आप द्वारा अपनायी जा रही है मुझे उम्मीद है कि कल को हो कर रेफरेंडम लेने का यही तरीका राईट टू रिकॉल का मार्गप्रशस्त करेंगे जिसकी मांग कभी जय प्रकाश नारायण जी ने कही थी। राईट टू रिकॉल किस तरह कार्यरूप में आ पायेगा इस पर राजनितिक विद्वानो में भी चिंतन रहा है साथ ही यह आमजन के मानस में भी है ।आज भले हीं यह अटपटा लग रहा हो लेकिन पहली बार किसी राजनितिक दल ने निर्णय लेने की प्रक्रिया में जनता को चुनाव वा सरकार बनाने के अतरिक्त सहभागी बनाया है. प्रजातंत्र में जनता की सहभागिता पांच साल में एकवार का इवेंट नहीं है। सुचना क्रांति के इस युग में प्रभावकारी ई - गवर्नेस आनेवाले दिनों में प्रभावकारी रहेंगे। राजनितिक पंडित भी मानते रहे हैं कि लिए जाने वाले निर्णय में लोगों को भी सहभागी बनाया जाय जो कोशिश कर रहे हैं उनका उपहास उचित नहीं होगा । हमें नहीं भूलना चाहिए कि पहलीवार १९७७ में आमलोगों के बीच शपथ समारोह कि गयी ,फिर कुछ सरकारें ने कैबिनेट कि मीटिंग राज्य मुख्यालय से बहार की ,लालू प्रसादजी खेत और खलिहान में संसद कि बात कर रहे है और श्री राजीव गांधी ने कुछ दिन पहले जनता से जोड़ने कि बात कही है यह सभी यह दर्शाता है कि प्रजातंत्र में जनता से नजदीकी स्थापित होना जरुरी है यह संपर्क निरंतर हो मात्र पांच साल में एकवार का न हो।
Thursday, 19 December 2013
Wednesday, 18 December 2013
जनप्रतिनिधियों का जनता से जुड़ा रहना जरुरी है तभी वे जनता कि समस्याओं और बेहतरी के लिए उसे सरकार के नजर में ला सकते हैं और सच्चे जनप्रतिनिधि का फर्ज निभा सकते हैं , अब वेतन भोगी जनप्रतिनिधियों को जवाबदेह होना है इसके लिए साल में कम-से कम १०० दिन अपने क्षेत्र में रहना ,जनसम्पर्क कर लोगों कि समस्या को देखना और सुनना ,इन समस्याओं के समाधान हेतु स्थानिय प्रशासन से मिलना आदि साथ ही अपने वेबसाइट पर किये गये कार्यों को अपडेट करना और सीधे और fb के माध्यम से जनता के संपर्क में रहना जरुरी है ,आमजन अब वेतन और सुबिधाभोगी प्रतिनिधियों का कार्य देखना चाहती है ,सभी दल को इसे सुनिश्चित करना चाहिए तभी लोगों का विश्वास राजनितिक दलों पर मजबूत होगा।
Monday, 12 August 2013
कल नागपंचमी है उसदिन नाग देवता की पूजा की जाती हैl नागनाथ सांपों के राजा हैं धरती के सबसे विषैला जीव का राजा ! इनका डंसा पानी भी नहीं मांगता l भला ऎसे जीव की पूजा अर्चना से ही प्राणी की रझा हो सकती है उन्हें नागपंचमी के दिन दूध -लावा देकर प्रसन्न करते हैं हमलोग l सांप देवता हम लोगों की पूजा स्वीकार करते हैं और रझा करते हैं l हे नागदेवता ! हमें हमारे नागनाथ और सांपनाथ से रझा करना प्रभु !!
Friday, 9 August 2013
ईद मुबारक
ईद मुबारक
आज ईद है ,सबेरे उठ कर फेसबुक खोला और अपने कुछ मित्रों को ईद का मुबारकवाद दिया ,मेसेज देखा मेरे बचपन के एक मित्र का था फिर दोनों मित्र मोबाइल पर काफी देर तक बातें की वे रात में ही भारत आये हैं जानकर ख़ुशी हुई कि वे कुछ ही वर्षों में अपने गाँव /होम टाउन में आकर खेतीवारी करेंगे ,खेती में उन्हें काफी अनुभव है और देश -विदेश की खेती को नजदीक से देखने और खुद का भी फार्म का अनुभव है l मैंने भी शीघ्र गाँव /होम टाउन जाने की मंशा जतायी उन्होंने प्रसन्नता दिखाते हुए साथ साथ गाँव में खेतीवाड़ी करने का भरोसा दिलाया मुझे जैसे लगा कि मेरी मुराद मील गई सही में मुझे तो ईद का चाँद मील गया lFriday, 26 July 2013
FOODY
वाह ! किया खाना है मजा आ गया !! भाई पुत्र की प्राप्ति पर बधाई हो ,बधाई हो लक्ष्मी जी का आगवान हुआ है ,भोज देना पड़ेगा ,समधी जी बारात का स्वागत दिल खोल कर कीजियेगा या फिर यह सुनते हैं की डील हो जायेगा तो पार्टी देंगे , अरे खिलाओ काम हो जायेगा यानि बिना भोज ,खाना ,पार्टी का कुछ नहीं होता क्योंकि आदमी का सबसे प्यारा फ़ूड है और जरुरत भी . हम सभी फूडी हैं l किसी के आत्मा की प्रसन्नता अच्छे भोजन से ही मिलती है l हर अवसर पर दिल खोल कर खायें और खिलाएं lमैं तो कहूँगा कि खिलाने का अवसर बनायें l भूखे को भरपेट ,पंडित को दही - मिठाई पवित्र पूर्वक खिलाने से पुन्य की प्राप्ति होती है l कोई भी आयोजन भोजन के बिना सम्भव नहीं है ,मनुष्य को सबसे ज्यादे संतुष्टि भोजन से ही मिलती है ,भोजन मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं मांसहारी और शाकहारी l दोनों रहे और भोज के उतर्राध्य में दही ,मिठाई ,आम ,अमावट,खीर /पायस,शिरखंड,केला और अंत में आइसक्रीम हो तो फिर कहना ही किया l हमारी दिनचर्या नाश्ते से शरू होकर ,लंच ,स्नैक ,डिनर और सपर यानि जागने से लेकर सोने तक खाने की पूरी रुटीन हीं तो है lआप यदि अच्छे मेजवान हैं और दुसरे को खिलाने का तरीका और सलिका जानते हैं तो आप सबसे सफल होंगे lपूरे विश्व में खाने का कारोबार से बड़ा कोई कारोवार नहीं होता l आजकल यह चर्चा है कि ५ से १२ रुपये में भरपेट भोजन मिल सकता है भाई भारत जैसे देश में इसमें अचरज किया है यदि आप सामाजिक प्राणी हैं दुसरे के ख़ुशी और दुःख में शामिल रहते हैं तो आप बिना पैसा खर्च के छक कर भोजन कर सकते हैं ये भारत देश है जहाँ हर अवसर पर भोज खिलने की प्रथा है l
Tuesday, 23 July 2013
DARBHANGA RAJ: MACE FOR COUNCIL OF STATE
DARBHANGA RAJ: MACE FOR COUNCIL OF STATE: MACE FOR COUNCIL OF STATE Presentation by Maharajadhiraja OF Darbhanga. The Maharaja ...
Monday, 22 July 2013
GLORY OF DARBHANGA
रिसर्च इंस्टिट्यूट की भू संरचना तो देखने लायक है बागमती नदी से घिरा ५२ एकड़ का यह कैंपस सही में शोध के लिए स्वतः प्रेरित करता है ,नदी के दुसरे तट पर सती स्थान का झेत्र आपको सांसारिक ज्ञान से दूर ले जाता हुआ महसूस होगा इस जगह की मनोरम सुन्दरता , आम का बगीचा ,मंदिर मन मोह लेता है इसी तरह सी एम कालेज जो बागमती नदी के पूर्वी तट पर है और दुसरे तट से सटा खेल के मैदान में खेल का आनंद आपको हमेशा आने को कहेगा .इसी तरह माधवेश्वर का तालाव जिसके चारों ओर मंदिर है वस्तुतः ये मंदिर दरभंगा राज के महाराजों के चिता पर बने हैं जिसमे महाराजाधिराजा रामेश्वर सिंह जो खुद भारत के एक महान साधक थे , की चिता पर रामेश्वरी श्यामा मंदिर काफी प्रख्यात है इसी तरह महाराजा लक्ष्मिश्वर सिंह की चिता पर तारा मंदिर , महाराजा रुद्रेश्वर सिंह ( महाराजा रामेश्वर सिंह और लक्ष्मिश्वर सिंह के पितामह ) के नाम पर काली और अंतिम महाराजा कामेश्वर सिंह की चिता पर काली(कामेश्वरी श्यामा ) मंदिर है ,हाँ श्यामा मंदिर के समीप अंतिम राजमाता जी के चिता पर लाल पत्थर का अन्नपूर्णा मंदिर है जहाँ पूजा करने से संतान की प्राप्ति होती है महाराज लक्ष्मिश्वर सिंह को संतान नहीं था उनके छोटे भाई महाराज हुए उनके पहली पत्नी से संतान नहीं हुआ तब किसी पहुंचे हुए साधक के कहने पर महराजा की दूसरी शादी हुई जिससे महाराजा रामेश्वर सिंह को तीन संतान हुआ दो पुत्र और एक पुत्री। राजमाता जी माँ अन्नपूर्णा की अवतार थी l माधवेश्वर प्रांगन में महादेव मंदिर है जो चित पर नहीं है और सबसे प्राचीन है l तालाब के चारों ओर परिकरमा करने का अपना ही महत्व है लगेगा ही नहीं की आप शमशान में है वस्तुतः अब तो यह प्रांगन तीर्थ स्थल का रूप ले लिया है कभी श्यामा मंदिर के सामने घंटाघर का घंटा रात के आरती के समय बजते ही सियार दौर पड़ते थे और भूकते थे l दरभंगा रेलवे स्टेशन से दरभंगा मेडिकल कॉलेज / हॉस्पिटल तक एक सीध में तीन तालाव हराही, दिग्ही,और गंगासागर आकाश से भी देखने से आपको आकर्षित करेगा आनंदबाग महल के पीछे की तालाव जिसमे कभी दो मोटर बोट चला करता था आपको केरल की याद दिलाएगी ,इसी तरह दरभंगा में अनगिनित तालाब हैं जिसमे आप फिशिंग के साथ आनंद ले सकते हैं l मोती महल स्थित तालाब तांत्रिक साधना के लिए है इस तालाब का जाठ बीच मे नहीं है l आनंदबाग महल के सामने की तालाब की आकृति भारत के नक़्शे के तरह है इसी तरह नारगोना पैलेस के पूरब में स्थित तालाब में महाराजा स्विमिंग किया करते थे बेहतरीन स्विमिंग ट्रैक था जिसका अवशेष अभी भी है l शहनाई के महान वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की अंतिम इच्छा दरभंगा के तालाब में स्नान की थी जहाँ बचपन में वे स्नान करते थे lपग - पग पोखर माछ मखान को चिरतार्थ करता मिथिला का यह सुंदर शहर दरभंगा जल संसाधन से भरपूर है l इसे तालाबों का शहर कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं है l दरभंगा में १००० वर्ष पुराने तालाब हैं l
Sunday, 21 July 2013
महात्मा गाँधी के आदेशानुसार स्वतंत्रता सेनानी कमलेश्वरी बाबू की देख -रेख में दरभंगा शहर के मध्य (दरभंगा टावर के नजदीक ) एक राष्ट्रीय विद्यालय (नेशनल स्कूल )की स्थापना १९२० में की गई l इस स्कूल से अनेकोनेक मेधावी तथा राष्ट्र भक्त छात्र निकले l स्व .मात्रिका प्रसाद कोइराला ,भूतपूर्व प्रधानमंत्री,नेपाल भी इसी स्कूल के छात्र थे l यह स्कूल १९३० आते -आते स्वतंत्रता आन्दोलन का मुख्य केंद्र बन गया l दरभंगा के नामी असहयोगी नेता ब्रज किशोर प्रसाद और बाबू धरनीधर ने इस विद्यालय को सत्याग्रह सम्बन्धी सभी प्रमुख्य क्रिया -कलापों का केंद्र बना रखा था l पं.राम नन्दन मिश्र yएवं उनकी पत्नी की प्रेरणा से १९२९ में एक युवक संघ की स्थापना दरभंगा में स्व .कमलेश्वरी बाबू ने की उसका भी मुख्यालय इसी स्कूल को बनाया गया l महात्मा गाँधी ,डॉ.राजेन्द्र प्रसाद ,जयप्रकाश नारायण ,गुलजारी लाल नंदा ,सत्यनारायण सिन्हा ,कर्पूरी ठाकुर सहित अनेक स्वतंत्रता सेनानी आन्दोलन के दिनों यहाँ आ चुके हैं l आज इसका भवन गिरने की स्थिति में है l
बालिग होने के लिय कितना दुःख बर्दास्त करना पडता है इसका एहसास ईश्वर ने आखिर करा ही दिया लेकिन अभी सही मायने में मैं बालिग नहीं हुआ था वरना फुट फुट कर रोता बिलखता नहीं संयमित रहता
दुसरे को धैर्य दिलाता ,अपने कर्तवय को आंसू पी कर करता। सँभालने में कुछ वक्त लगा आखिर बालिग हो ही गया l माँ का एक सड़क हादसा में चोट लगने के बाद पटना पहुँचते पहुँचते साँस की गति रुक गयी ठीक इसके छ्ठे दिन बाबूजी का गुजरना जैसे लग रहा था की नियति पटकथा लिख रहा हो और हम सब तमाशविन बन सब कुछ देखने के लिए विवश हों .नियति के आगे कितना बेबश है आदमी ! खुद को संभालना कठिन था पंडित लोग विवेचना में व्यस्त थे कि अब श्राद्ध -कर्म एक हो या अलग अलग और मै बुजुर्ग लोगों में बाबूजी / माँ को तलाश रहा था जो आगे छाया दे जिनके समीप जाने पर शीतलता मिले lबाबूजी के एक मित्र ने डबडबायी आँखों से कहा पिताजी जाते जाते तुम लोगो पर उपकार करते गये अब एक ही खर्च में दोनों भोज हो जायेगा l श्राद्ध कर्म के बाद लगा की मेरे उपर से माता -पिता का छत्र नहीं रहा यानि बालिग हो गया l इस संसार में अब ओ नहीं रहे उनकी याद ही अब मेरा संबल होगा सूनापन कुछ कहता है उनसे फिर मुलाकात नहीं होगी ,बात नहीं होगी उस सूनापन को शायद भर नहीं पायूँगा लेकिन जिन्दगी को जीना है हंस कर जिंदादेल्ली के साथ ,भाई चारे के साथ ,मोहब्बत के साथ येही तो सची श्रधान्जली होगा ,क्या सचमुच मैं बालिग हो गया !
दुसरे को धैर्य दिलाता ,अपने कर्तवय को आंसू पी कर करता। सँभालने में कुछ वक्त लगा आखिर बालिग हो ही गया l माँ का एक सड़क हादसा में चोट लगने के बाद पटना पहुँचते पहुँचते साँस की गति रुक गयी ठीक इसके छ्ठे दिन बाबूजी का गुजरना जैसे लग रहा था की नियति पटकथा लिख रहा हो और हम सब तमाशविन बन सब कुछ देखने के लिए विवश हों .नियति के आगे कितना बेबश है आदमी ! खुद को संभालना कठिन था पंडित लोग विवेचना में व्यस्त थे कि अब श्राद्ध -कर्म एक हो या अलग अलग और मै बुजुर्ग लोगों में बाबूजी / माँ को तलाश रहा था जो आगे छाया दे जिनके समीप जाने पर शीतलता मिले lबाबूजी के एक मित्र ने डबडबायी आँखों से कहा पिताजी जाते जाते तुम लोगो पर उपकार करते गये अब एक ही खर्च में दोनों भोज हो जायेगा l श्राद्ध कर्म के बाद लगा की मेरे उपर से माता -पिता का छत्र नहीं रहा यानि बालिग हो गया l इस संसार में अब ओ नहीं रहे उनकी याद ही अब मेरा संबल होगा सूनापन कुछ कहता है उनसे फिर मुलाकात नहीं होगी ,बात नहीं होगी उस सूनापन को शायद भर नहीं पायूँगा लेकिन जिन्दगी को जीना है हंस कर जिंदादेल्ली के साथ ,भाई चारे के साथ ,मोहब्बत के साथ येही तो सची श्रधान्जली होगा ,क्या सचमुच मैं बालिग हो गया !
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