Friday, 19 May 2017

मिथिला केसरी बाबु जानकी नंदन सिंह

 ख्याति प्राप्त स्वतंत्रता सेनानी मिथिला केशरी बाबु जानकी नंदन सिंह(1905-1968) दरभंगा जिलान्तर्गत मधेपुर विधान सभा झेत्र सं १९५२ में पहिल विधायक निर्वाचित भेल रहयत l २७ जुलाई १९५२ कें पहिल बेर हुनक नेतृत्व में दरभंगा टाउन हॉल सभा में सर्वसम्मति सं प्रस्ताव स्वीकृत भेल जे भारतीय गणतंत्र क अधीन बिहार राज्य सं फराक मिथिला राज्य बनय एवं एहि राज्य में शिझा क माध्यम मैथिलि होअय l २६ जुलाई १९५३ के उक्त प्रस्ताव क कार्यान्वयन लेल दरभंगा टाउन हॉल में सभा भेल l २२ नवम्बर १९५३ कें मैथिल संघ , कोलकाता में बहुत पैघ प्रदर्शन कयलेनआ गिरीश पार्क में सभा कयलेनl एकर प्रचार प्रेस क माध्यमे बहुत भेल जाहि से तत्कालीन कांग्रेस सरकार चिंतित भ गेल l फलतः मिथिला राज्य लेल सभा प्रदर्शन क लेल कोलकाता जायत कांग्रेस पार्टी क वरिष्ठ सदस्य बाबु जानकी नंदन सिंह अओउर किछु व्यक्ति सभ कें आसनसोल टीशन पर २२ जनवरी १९५४ के गिरफ्तार क लेल गेल l वो दरभंगा जिला परिषद् क अध्यझ सेहो रहला और बिहार विधान परिषद् क सदस्य सेहो भेला l जिला परिषद् में बहुत रास लोक कल्याण क काज करोलैथ l हिनक आवास लहेरियासराय क बंगाली टोला में रहैन्ह तथा इंद्रपुर डयोढी, मधेपुर दरभंगा सम्प्रति मधुबनी जिला क निवासी छलाह l १९५७ क चुनाव में कोंग्रेस से टिकट नहि भेटला संता निर्दलीय चुनाव लडला और रनर अप रहला l  मिथिला आन्दोलन क हिनक हारि से बहुत बेसी अघात लागल l
Mithila Keshari Babu Jankinandan Singh ,First MLA of Madhaipur, Darbhanga,Who was arrested on 22Jan 1954 at Asansol Railway Station when he was in way to Kolkata to participate in a procession for curving Mithila State from Bihar. After Independent a resolution was passed in a meeting held in Darbhanga Town Hall on 27 July 1952 to create Mithila State .His Residance was at Bengali Tolla,Darbhanga. He was also the Chairman of Darbhanga District Board and done lots of welfare work and Elected Member in Bihar Legislative Council

Friday, 12 May 2017

ONLINE MAHARAJA

ज्यादे दिन की बात नहीं है जब २१ वीं शादी के प्रारंभ में सुचना तकनिकी आमलोगों की जिन्दगी बदलनी शुरू कर दी सबसे पहले सेल फ़ोन ने बातचीत करना सरल किया सुचना तकनिकी  का  रेलवे टिकेट ,बैंक लेनदेन में  प्रभाव दिखने लगा फिर सुचना तकनिकी में रोजगार के अवसर ने माध्यम वर्ग को एक बुलंदी दी तबतक सोशल मिडिया , ओनलाइन बिज़नस के आ जाने  से जैसे इस वर्ग के पंख लग गये  मिडीयोकार भी गूगल में ऊँगली कर विद्वान का कान काट रहा है l सुविधा इतनी की अपने को महाराजा से कम नहीं समझता l ऑनलाइन ट्रेन ,बस , हवाई जहाज की टिकट ली ऑनलाइन टैक्सी -ओटो बुक किया ,खाना बुक किया ,खरीदारी की जेब में कार्ड रखा चल दिये शहंशाह की तरह l कमाई के भी एक से एक ऑनलाइन तरीका l  . अब तो हर काम सरलता से बैठे बैठे हो रहा है लेकिन सबसे बुरे दिन आ गये अनपढ़ का अब उन्हें अपने अशिझित होने का एहसास ज्यादा सालता है जब उनका छोटा मोटा रोजगार भी ऑनलाइन करके शिझित वर्ग ले जा रहे हैं जो ऑनलाइन होना चाहता है ठगी का शिकार हो कर जमा पूंजी गवां बैठता है l अशिझित बात कर सकता है ,फोटो ले सकता है ,गाना सुन सकता ,फिल्म देख सकता है लेकिन उत्थान नहीं l संबिधान ने प्राथमिक शिझा अनिवार्य की थी लेकिन ७०  साल में इसे गंभीरता से नहीं लिया गया l  

Thursday, 11 May 2017

पेड़ों के झुरमुट के  बीच सड़क  से गुजरना मुझे बहुत पसंद है साथ में फूलों की खुशबु और रंगबिरंगे फूल खिले हों तो मुझे स्वर्गिक आनंद मिलता है l   मौसम खुशगवार हो बगल में सुसज्जित आशियाना हो तो लगता है यहीं अपना ठिकाना बना लूँ l   ऐसे सुहाने वातावरण में शांति से  कुछ लिखूं पढूं और आभासी दुनिया से जुड़ा रहूँ l बस यही चाहत हैl  कभी अपने गाँव या शहर दरभंगा में कुछ ऐसा हीं शकुन था लेकिन अब कहाँ !
 गाँव को तो जैसे किसी की नजर लग गयी लोग भी अब गाँव छोड़ कर पलायन कर रहे हैं आवश्यक सुविधा का नितांत आभाव है न शिझा की अच्छी व्यवस्था , न स्वास्थ्य ,न मनोरंजन ,न खेती ,न पानी  ऊपर से बाढ़ का खतरा फिर किसी का मन क्यों लगे ! अपना शहर कभी सुन्दर था लेकिन अब तो केवल भीड़ ,जलजमाव l  हरियाली तो दिखती नहीं l
एक आध वर्ष में सेवानिर्वित हो जाऊंगा l रोजी- रोटी और परिवार के निर्वहन   में इस बुरीतरह उलझा रहा कि पढने लिखने के अपने शौक को रिटायरमेंट के बाद शकुन से करने का सोच रखा हूँ l बस अभ्यास बना रहे इसलिए डैयरी लिखने की आदत बना रखा है l  लैपटॉप लेने के बाद कुछ कुछ सोशल मिडिया पर लिख देता हूँ कभी कभी अखवार में भी कुछ लिख कर भेज देता हूँ और छप भी जाता है l  लेकिन तन्मयता जब बनती है तो दुसरे काम  रह जाते हैं l पूरी तरह रचनात्मक कार्य पर समय नहीं दे पाता l     मुझे  एक साथ भागमभागी में सब काम करना नहीं भाता l मै हमेशा अपने को पढाई लिखाई में प्राथमिक विद्यालय का छात्र मानता हूँ और मुझे अभी बहुत कुछ सीखना है l पूरी तरह नौसिखुआ हूँ मैं l इसी डर से    कभी कभी ऑनलाइन बिज़नस का भी सोचता हूँ क्योंकि एक अच्छी जिन्दगी के लिए रूपये पैसे का होना जरुरी है दूसरी मुझे व्यापार का तजुर्बा और पढाई भी है lआप कह सकते हैं कि यह मेरा दूसरा शौक रहा है यदि मेरे पास घर चलाने के पैसे रहे होते  तो पढाई के बाद मैं व्यापार में उतरता l अब मै आप मित्रों पर छोड़ता हूँ कि आप मार्गदर्शन करें l