मैं अपने शहर को लेकर एक सपना देखा !! चौरी सड़क ,फूटपाथ ,सड़क के किनारे लंप पोस्ट ,दोनों तरफ छोउंह दार और फूलों का पेड़ , बगल से गुजरती ढकी हुई नाली ,साफ़ सुथरा परिवेश ,कुछ दुरी पर पार्क ,2-3 किलो मीटर पर स्कूल /बाजार प्रांगन / स्वास्थ्य केंद्र /खेल का मैदान ,दुःख -सुख में भाग लेते पडोशी ,सभी घरों में पानी , बिजली ,गैस का कनेक्शन ! धर्मशाला , हर लोगों को काम और धंधा ! क्या आपके आँखों में भी सपने है ? क्या हमने बड़े सपने देखे ? कलाम साहेब कहते हैं की बड़े सपने देखो ,छोटा सपना देखना पाप है ! किया हमारे सपने पूरा नहीं हो सकता ? आखिर कियों ????